सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद ध्वस्त होने के बाद 7 सितंबर को SP का 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर जाने से रोका गया। विधायक अतुल प्रधान को मेरठ में हाउस अरेस्ट किया गया, पुलिस से तीखी बहस हुई। मुजफ्फरनगर दंगों के हवाले वाले होर्डिंग लगाए गए जिन्हें पुलिस ने हटाया।
सहारनपुर/मेरठ। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को 5-6 सितंबर 2026 को 16 घंटे के ऑपरेशन में ध्वस्त किए जाने के बाद राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया। 7 सितंबर को समाजवादी पार्टी के 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सहारनपुर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने कई नेताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया।
SP विधायक अतुल प्रधान को मेरठ में हाउस अरेस्ट किया गया। जब उन्होंने जाने की कोशिश की तो पुलिस से तीखी बहस हुई। सांसद हरेंद्र मलिक को भी हाउस अरेस्ट किया गया। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि उनके कानूनी प्रतिनिधिमंडल को रात भर हाउस अरेस्ट में रखा गया।
प्रशासन का कहना है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण था और मस्जिद कमेटी की अपील सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दी थी। स्थानीय धार्मिक नेताओं का दावा है कि यह मस्जिद करीब 100 साल पुरानी थी। सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में मुजफ्फरनगर दंगों के हवाले वाले होर्डिंग लगाए गए जिन्हें पुलिस ने हटाया।
BSP प्रमुख मायावती ने धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण पर सवाल उठाते हुए सरकार से वैकल्पिक समाधान खोजने की मांग की। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।