नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में मृतकों की संख्या 1,344 से अधिक हो गई है। भारत ने NDRF टीमें और तकनीकी विशेषज्ञ भेजे हैं। नेपाल सरकार ने बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों से 'क्लाइमेट जस्टिस' के तहत मुआवजे की मांग उठाई है।
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी में मृतकों की संख्या 5 सितंबर तक 1,344 से अधिक हो गई है। हजारों लोग अभी भी लापता हैं और बचाव अभियान जारी है।
यह आपदा तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर पिघलने से उत्पन्न अचानक बाढ़ के कारण आई थी, जिसने रासुवा, तनहुं और नुवाकोट जिलों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। बाढ़ में लगभग 2,000 इमारतें, 38 किलोमीटर सड़कें और कई पुल नष्ट हो गए। त्रिशूली और त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
भारत ने इस आपदा में नेपाल की मदद के लिए NDRF टीमें और तकनीकी विशेषज्ञ भेजे हैं। विशेष भारतीय तकनीकी टीमें जलविद्युत सुरंगों में फंसे लोगों को खोजने और बचाने के लिए स्थल सर्वेक्षण कर रही हैं। विदेश मंत्रालय भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए समन्वय कर रहा है।
नेपाल सरकार ने इस आपदा को जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हुए 'क्लाइमेट जस्टिस' की मांग उठाई है। नेपाली अधिकारियों ने बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों से जलवायु-प्रेरित आपदाओं के लिए मुआवजे की मांग की है। चीन ने भी ग्लेशियल झील के जोखिमों के बारे में डेटा और सहायता प्रदान की है।
भारत में उत्तर प्रदेश और बिहार में नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। NDRF और SDRF टीमें सतर्क हैं।