केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा और तीन अन्य के खिलाफ LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से ₹1,322 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। 2018 में नेटवर्थ को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर लोन लेने का आरोप है।
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा, पंकज सुरोलिया, अमीष पांड्या और राजीव ढोलकिया के खिलाफ LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) से ₹1,322 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज की है।
आरोप है कि 2018 में सुभाष चंद्रा ने अपनी कंपनियों के लिए ऋण सुविधा प्राप्त करने हेतु 59,113 करोड़ रुपये की नेटवर्थ का प्रमाणपत्र जमा किया था। इसके आधार पर उन्हें 980 करोड़ रुपये के दो ऋण स्वीकृत किए गए, जो ब्याज और शुल्कों के साथ बढ़कर ₹1,322 करोड़ से अधिक हो गए।
विवाद तब गहराया जब सुभाष चंद्रा ने अपनी व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही के दौरान दावा किया कि उनकी नेटवर्थ कभी 50,000 करोड़ नहीं थी। 2024 में उन्होंने अपनी नेटवर्थ मात्र 31.79 करोड़ रुपये बताई। LIC हाउसिंग फाइनेंस ने इस विरोधाभास को धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के रूप में चिह्नित किया।
NCLAT ने पहले NCLT द्वारा 22,006 करोड़ के दावों को 6.5 करोड़ में निपटाने की योजना पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से भी रोक दिया है। यह मामला देश के बड़े कॉर्पोरेट धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जा रहा है।